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बोलो है ना ये संगीत का ही कमाल |||


पंछियो की चहचहाहट हो

या हवाओं की सर सर

या फिर हो ये नदियों की कल कल

ये संगीत ही तो है

कुदरत का जो कानों में गूंजता है


हमारे यूँ पल पल में

वो पहली किलकारी बच्चे की

संगीत से कम नहीं

एक माँ के लिए उससे प्यारी कोई धुन नहीं


ये साँसों की बांसुरी

ये धड़कनों की ताल

ज़िंदा है हम अगर

बोलो है ना ये संगीत का ही कमाल


-भिमेश भित्रे (Bhimesh)

mail id- artist.bhimesh@gmail.com


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