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Emptiness

Updated: Jul 13, 2020


लौट चला हूँ मै आज वहाँ जहा सब कुछ अपनासा लगता है ...

ये अँधेरा, ये खामोशी और ये तन्हाई ...

काफी सुन्दर सा लगता है इस जहां मै जहा खुदका भी साया साथ छोड़ जाता है ...

आँखों से जब आंसू निकलते है तब वो बिस्तर पे यादो की एक खूबसूरत तस्वीर बनाकर पूरी रात मुज़से बात करते है ...

अकेले बैठे मुझे खुदपर बोहोत गर्वे होता है जब बिताये हुवे लम्हो की किंमत चुकानी पड़ती है खुदको कोसकर ...

वक़्त की सुईया तो दोनों चलती है लेकिन ना जाने कैसे वक़्त ठहेर सा जाता है ....

हां इनसान हूँ मै अंधेरे से डर तो मुझे भी लगता है ....लेकिन इस जगह का नशा शराब से भी ज़्यादा शराबी है ...


इस बार टूटा नही हूँ ...बस हार गया हूँ...

-AASHIV

#poem#nazam#shayari#couples#love


DOWNLOAD THE EMPTINESS SONG

LINK- https://drive.google.com/file/d/10_UixMMxxZ8NwXHHKOt_z8dihQLcYoRJ/view?usp=sharing



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