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वो इंतज़ार था जिसे पाने के लिए वक़्त भी तरसता था ...

Updated: Jul 27, 2020


वो गुलाल सा था ,जो खून की तरह रगो में बस गया ...

वो ख्वाब सा था , जो हकीकत की तरह धड़कन में सज्ज गया .....

वो इंतज़ार था जिसे पाने के लिए वक़्त भी तरसता था ...

वो पानी था जिसे बरसने के लिए बादल भी गरजता था ....

वो तो फकत स्याही था जिसे हर कलम अपना बनाना चाहता था ....


वो हवा था जिसे तूफ़ान में ढलना पसंद था ...

वो आग था जिसे ठंड में भी जलना पसंद था ....

वो तो महज़ एक रूप था जिसे ख़ुशी में ढलना पसंद था .....

-AASHIV

link-https://drive.google.com/file/d/1g0VIisVdNrfxXahjyx_7ZuROnEwKxAm7/view?usp=sharing

#poem#nazam#shayari#couples#love


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