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काटो को फूल बनाते बनाते फुलोसेही वो ठुकराया गया....

Updated: Aug 11


किसीको पलकोपे बिठा कर

अपनी ज़िन्दगी उसके नाम करता गया ....

कोई गुमनामसा वो मुसाफिर

आज फिर एक बार ठुकराया गया ....

किसी को अपने सीनेसे लगाकर

आसुओ की बूंदे गिराता गया.....

अपनोंको खुश करते करते

अपनों सेहे वो ठुकराया गया....

किसीके सपने सजाते सजाते

अपनेहे सपनोंको भुलाता गया .....

खयालो को हकिगत बनाते बनाते

हकिगत सेहे वो ठुकराया गया ....

बेपनाह मोहोबत करते हुवे

नफरत कोही उसने अपने नाम किया ...

काटो को फूल बनाते बनाते

फुलोसेही वो ठुकराया गया....


-DHAWAL

Email- dhawalmohod98@gmail.com


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